
साक़ी पिलाए जा बेशक़ शाम हो जाए
जो होना है आज वो अंजाम हो जाए
मयक़शी के दौर सरे-आम हो जाए
शहर के रिंदों में अपना भी नाम हो जाए
क़हक़शाओं को छू आऊं, ग़ुरबत के ग़म भूल जाऊं
जितनी भी हसरतें हैं सब तमाम हो जाए



ज़ेहन में न जाने कितनी सिलवटें हैं,वो ममता की मूरत है,
तो कभी एक लाडली बेटी...
एक आदर्श बहू होने के साथ,
वो बंधी है राखी की डोर से...
कभी वो कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ती है,
तो कभी उस अबला को रहना पड़ता है दहलीज़ की मर्यादाओं में...
नारी की शक्ति पर टिका है सारा जहान
नारी के इन सब रूपों को हमारा सलाम
- पुनीत भारद्वाज
Song- बावरा मन...
Lyricist- स्वानंद किरकिरे
Singer- स्वानंद किरकिरे
Music- शांतुनु मोइत्रा
Film- हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी..
Director- सुधीर मिश्रा
Song- चड्डी पहनके फूल खिला है
Lyricist- गुलज़ार
Music- विशाल भारद्वाज
PROGRAMME- मोगली
जंगल-जंगल बात चली है, पता चला है..
अरे चड्डी पहनके फूल खिला है, फूल खिला है...
जंगल-जंगल पता चला है, चड्डी पहनके फूल खिला है..
जंगल-जंगल पता चला है, चड्डी पहनके फूल खिला है..
एक परिंदा होए शर्मिंदा..
था वो नंगा...
भइया, इससे तो अंडे के अंदर
था वो चंगा...
सोच रहा है बाहर आकर क्यूं निकला है...
अरे चड्डी पहनके फूल खिला है, फूल खिला है...
जंगल-जंगल पता चला है, चड्डी पहनके फूल खिला है..
जंगल-जंगल पता चला है, चड्डी पहनके फूल खिला है..


18 अगस्त को गुलज़ार साहब पैदा हुए थे... गुलज़ार साहब के जन्मदिन पर मेरी ये पेशकश...






