
सावन की पहली बूंदों में
दिल्ली सारी धुल गई है
बस दिलों में मैल बाकी है
कम्बख़्त बारिश ये क्यों भूल गई है












ख़ुशियों के रॉकेट
मुस्कुराहटों की फुलझड़ी
प्यार का अनार
खिलखिलाहटों की लड़ी
आनंद की आतिशबाज़ी में बनी रहे आपकी खुशहाली
आपके जीवन को इस बार कुछ यूं रोशन करे दीवाली
अंधकार की अमावस में हो उजाले का उल्लास
इस प्रकाश पर्व पर महालक्ष्मी करें आपके घर वास
और सुख-सृमद्धि सदा रहे आपके आस-पास
"शुभ दीपावली"
- पुनीत भारद्वाज

उजालों की दीवाली में खुशी के रॉकेट छोड़ तू
खुशी की उस रोशनी में अपना अक़्स खोज तू
वो अक़्स जो मुस्कुराहट की चांदनी से बना हो
वो अक़्स जो खिलखिलाहट की दीवानगी से बना हो
उससे आंखें मिलाने सीख ले,ज़िंदगी की घड़ी-दो-घड़ी में हंसना-हंसाना सीख ले..