मोर म्चावै बागां मै शोर
गरजे-बरसे बदरा घणघोर....
धरा की देह पर रंग हैं झलके
पहन लहरिया...जोबण छलके...
छम-छम...छमके.... बरखा बहार
जीया भी गावै मेघ मल्हार.....
- पुनीत बालाजी भारद्वाज











ख़ुशियों के रॉकेट
मुस्कुराहटों की फुलझड़ी
प्यार का अनार
खिलखिलाहटों की लड़ी
आनंद की आतिशबाज़ी में बनी रहे आपकी खुशहाली
आपके जीवन को इस बार कुछ यूं रोशन करे दीवाली
अंधकार की अमावस में हो उजाले का उल्लास
इस प्रकाश पर्व पर महालक्ष्मी करें आपके घर वास
और सुख-सृमद्धि सदा रहे आपके आस-पास
"शुभ दीपावली"
- पुनीत भारद्वाज