
"है ख़ुदा तो है मज़हबमज़हब से ही मंदिर-मस्जिदमंदिर-मस्जिद में होते झगड़ेझगड़े भी तगड़े-तगड़े...इक ख़ुदा के फेर में क्यूं खुद है रोताना होता ख़ुदा तो तू ख़ुदा होता....."

"है ख़ुदा तो है मज़हबमज़हब से ही मंदिर-मस्जिदमंदिर-मस्जिद में होते झगड़ेझगड़े भी तगड़े-तगड़े...इक ख़ुदा के फेर में क्यूं खुद है रोताना होता ख़ुदा तो तू ख़ुदा होता....."

एक हाथ तो बढ़ाओ, आसमां पे फल लटक गए हैं
अपनी भूख मिटाओ, तारों के झुंड जो पक गए हैं
ये स्वाद में मीठे होंगे, ये बात तो पक्की ही है
साहिल के कंधों पे लहरों ने थपकी दी है....
पेड़ों के पत्तों पे, किसने ये कोहरा बिखेरा
झूमते फूलों पे, ये रंग है किसने फेरा
ये कैसा करिश्मा है, ये बात गज़ब की है
साहिल के कंधों पे लहरों ने थपकी दी है....
वो पंछी अपने घर से फिर से निकल पड़े हैं
हम भी उड़े आसमान में, क्यों सोच में पड़े हैं
ख्वाहिशों को पंख लगाएं, ये उड़ान हसरत की है
साहिल के कंधों पे लहरों ने थपकी दी है
सागर के आंचल में सूरज ने झपकी ली है....


" ख़ून में हरारत जिस्म में जान बाकी है
चंद लाल क़तरों में अभी कितने तूफ़ान बाकी है
हर हद तक करले ऐ वक़्त तू जितना भी सितम
हौसला अभी ज़िंदा है, अभी ख़ून भी है ग़रम
ऐ मौत ठहर थोड़ा इंतज़ार करलेअभी तो ज़िंदगी में बहोत काम बाकी हैं......"




दौलत का शजर* हमेशा हरा नहीं होता, * पेड़
कभी क़िस्मत पर किसी का पहरा नहीं होता,
हम मेहनतक़श हैं, मिट्टी में भी सोना उगा देंगे,
मुक्क़मल मुसाफ़िरों के लिए सहरा, सहरा* नहीं होता। *रेगिस्तान
- पुनीत भारद्वाज



ज़ेहन में न जाने कितनी सिलवटें हैं,वो ममता की मूरत है,
तो कभी एक लाडली बेटी...
एक आदर्श बहू होने के साथ,
वो बंधी है राखी की डोर से...
कभी वो कंधे से कंधा मिलाकर आगे बढ़ती है,
तो कभी उस अबला को रहना पड़ता है दहलीज़ की मर्यादाओं में...
नारी की शक्ति पर टिका है सारा जहान
नारी के इन सब रूपों को हमारा सलाम
- पुनीत भारद्वाज
Song- बावरा मन...
Lyricist- स्वानंद किरकिरे
Singer- स्वानंद किरकिरे
Music- शांतुनु मोइत्रा
Film- हज़ारों ख़्वाहिशें ऐसी..
Director- सुधीर मिश्रा
Song- चड्डी पहनके फूल खिला है
Lyricist- गुलज़ार
Music- विशाल भारद्वाज
PROGRAMME- मोगली
जंगल-जंगल बात चली है, पता चला है..
अरे चड्डी पहनके फूल खिला है, फूल खिला है...
जंगल-जंगल पता चला है, चड्डी पहनके फूल खिला है..
जंगल-जंगल पता चला है, चड्डी पहनके फूल खिला है..
एक परिंदा होए शर्मिंदा..
था वो नंगा...
भइया, इससे तो अंडे के अंदर
था वो चंगा...
सोच रहा है बाहर आकर क्यूं निकला है...
अरे चड्डी पहनके फूल खिला है, फूल खिला है...
जंगल-जंगल पता चला है, चड्डी पहनके फूल खिला है..
जंगल-जंगल पता चला है, चड्डी पहनके फूल खिला है..