बहुत फ़ासला है, अब ये फ़ैसला लो...

तुम्हारे खुदा की हम करें आरती

हमारे खुदा की तुम आयते गाओ
बहुत फ़ासला है, अब ये फ़ैसला लो
थोड़ा हम पास आएं, थोड़ा तुम पास आओ
क्यों हैं बिखरे-बिखरे, आओ खुद को समेटें
सरहदें जो दिल में, वो सरहदें मिटाओ
माना मुश्किल भुलाना, वो बीता ज़माना
अब कुछ हम भुलाएं और कुछ तुम भुलाओ
ना अल्हा क़सम लो, ना राम की क़समें
प्रीत की अब नई क़समें तो खाओ

- पुनीत बालाजी भारद्वाज


दंभ भरते थे जो कल अपनी दौलत के गुमान का....

आज शुक्रिया करते हैं वो इक छोटे से एहसान का....


कल मैं था उसकी जगह, आज वो मेरी जगह

कब पलटे तक़दीर....क्या भरोसा इंसान का...


अजी ये तो बस इस जहां की बात है....

कब रहता है एक जैसा मूड भी भगवान का...
                                                                              - पुनीत बालाजी भारद्वाज

'SAVE ME', 'SAVE MAA'


सदियों से जो बोझ सहती रही हमारा, आओ हम भी बनें इसका सहारा...

इसको मां कहते हम
जिस धरती पर रहते हम

पेड़-पौधे...जिसका श्रृंगार
आज उस पर होता अत्याचार

ना कुचलो मां के आंचल को
ना काटो घने इस जंगल को

इस दर्द का बोझ सहती है मां
'मुझे बचाओ...', कहती मां

धरती मां की लाज बचाओ
धरती मां को आज बचाओ


- पुनीत बालाजी भारद्वाज