शाहरुख खान...एक महानायक का उदय!


नब्बे के दशक में बहुत कुछ बदल रहा था...दुनिया ग्लोबल विलेज हो गई थी...ऐसे में सालों से परदेस में बैठे भारतीयों को हिदुंस्तान की याद आई....वो जागे और अपनी जड़ों की तलाश करने लगे......इस बीच हमारे सिनेमा में भी बदलाव हुआ..उसने अपने वक्त के नए नायक की तलाश की..लेकिन हर जगह उसे वही चालू मक्कारियां नज़र आई...जो आज से पहले भी फिल्मों मे दिखाई जा चुकी थी....बासी कहानियां..और बासी चेहरे....इस बीच दिल्ली का एक नौजवान अपने ख्वाबों को बुनकर मुंबई चला आया था...उसे नहीं मालूम था मंजिल कहां होगी...कैसी होगी..मालूम था तो बस इतना की उसमें काबिलियत है

The rising of a star…..
शाहरुख खान....एक नाम जो अपने आप में बुलंदियों की कहानी कहता है.... कहने की जरुरत नहीं कि इस शख्स ने अपनी फिल्मों से हमारी फिल्म इंडस्ट्री को कैसे नई हवा दी...मासूम शक्ल...औऱ चेहरा ऐसा जिससे कैमरा प्यार करता..एक ऐसा शख्स जो टीवी में फौजी बनकर अपने दुश्मनों को धूल चटा चुका था.अब बॉलीवुड में भी अपनी किस्मत आजमाना चाहता था..

Personal life---लेकिन हर फैसले की एक कीमत होती है..और शाहरुख ने भी उस कीमत की कई किश्तें चुकाईं...दिल्ली में 2 नबंबर 1965 को जन्मे शाहरुख ने अभी ठीक से होश भी नहीं संभाला था कि उनके पिता ताज मौहम्मद खान का निधन हो गया उसके बाद अपनी मां बेगम लतिफ फातिमा के पल्लू से बंधे रहकर भी शाहरुख ने ये बता दिया कि वो कोई साधारण इंसान नहीं है...दिल्ली के सेंट कोलंबस स्कूल में उन्हें न केवल बेस्ट स्टूडेंट होने की वजह से SWORD OF HONOUR के सम्मान से नवाज़ा गया..बल्कि स्कूल की क्रिकेट टीम में भी उन्हें जगह मिली....इसके बाद हंसराज कॉलेज से एक तरफ जहां उन्होंने इकोनॉमिक्स में अपनी ग्रेजुएशन कम्पलिट की बल्कि बैरी जॉन के एक्टिंग स्कूल से एक्टिंग की कई बारिकियां भी सीखीं...कॉलेज में ही उनकी मुलाकात गौरी से हुई...और शाहरुख दिल ही दिल में उन्हें काफी चाहने लगे...इस बीच शाहरुख की मां उन्हें दुनिया में अकेला छोड़ कर चली गई...और शाहरुख के पास सिवाए अपने सपनों के कुछ न बचा....जिसके बाद उन्होंने मुंबई जाने का फैसला किया....ये 1991 की बात है.....अपनी पहली फिल्म की रिलीज़ से कुछ पहले ही शाहरुख ने गौरी से शादी कर ली.....

Mumbai -City of dreams---

मुंबई आने पर शाहरुख को पता चला की एक टीवी स्टार होने के नाते उन्हें लोग जानते तो हैं...लेकिन उनका सफर आसान नहीं होने वाला..लेकिन खुद़ा को शायद कुछ औऱ ही मंजूर था और शाहरुख की दीवानगी का आलम पहली फिल्म से ही छाने लगा था.शाहरुख ने कभी राजू बनकर चमत्कार किया..तो कभी माया मेमसाहब जैसी फिल्मों से खुद को जोड़ा...इन फिल्मों से शाहरुख को शोहरत तो मिली लेकिन कामयाबी नहीं...
फिर एक ऐसा मोड़ आया जहां से इस सितारे में चमक पैदा होनी शुरु हुई...फिल्म थी बाज़ीगर...जहां शराफत के नकाब में छिपे एक एंटी-हीरो को जन्म लेते हमने देखा... इसके तुरंत बाद डर में एकतरफा प्यार में पागल एक सनकी आशिक के रोल में भी शाहरुख को खूब वाहवाही मिली...इस फिल्म ने शाहरुख के करियर को एक ऐसे अंजाम तक पहुंचाया जिसकी उन्हें तलाश थी...

Rise of a King---

अब तक जो शख्स हिंदुस्तान में अपनी काबिलियत का लोहा मनवा चुका था..उसने जब दिल वाले दुल्हनिया ले जाएंगे में राज मल्होत्रा के किरदार को जिया तो विदेशों मे बैठे भारतीयों के दिलों पर भी वो राज करने लगा...लोग शाहरुख में इंडस्ट्री के नए बादशाह को देखने लगे...
लोगों को उनका नया सुपरस्टार मिल चुका था...जो कभी किसी लड़की के लिए जुगनुओं के पीछे भागने की बातें करता..
तो कभी परदेस में बैठ कर दीवाने दिल के किस्से सुनाता.. शाहरुख की फिल्मों के इन्हीं उतार-चढावों ने उन्हें कहने पर मजबूर कर दिया की...
और इसके बाद शाहरुख का सितारा दिनों-दिन बुलंद होता गया...कुछ कुछ होता है....जोश..मोहब्बतें..कभी खुशी कभी गम ने जहां शाहरुख की पॉपुलैरिटी में चार चांद लगाएं..तो वहीं देवदास..चलते-चलते..मैं हूं न..स्वदेस...कल हो न हो..और वीर ज़ारा जैसी फिल्मों से शाहरुख ने अपनी एक्टिंग का लोहा मनवा लिया...इस बीच ओम शांति ओम और चक दे इंडिया जैसी फिल्मों ने शाहरुख का कद इतना बढ़ा दिया है...कि उन्हें छूना तो दूर उनकी ऊंचाई का अनुमान लगाना भी मुश्किल होता जा रहा है...अगर आने वाली फिल्मों की बात करें तो रब ने बना दी जोड़ी और बिल्लू बार्बर के दम पर एक बार फिर शाहरुख की बादशाहत को परवान चढ़ते हम देख पायेंगे....लेकिन इतनी शोहरत औऱ बुलंदियों के बाद इतना तो तय है कि शाहरुख के पास अब खुद अपने कामयाबियों का हिसाब रखने का वक्त नहीं है.....


तुषार उप्रेती....

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