सफलता की उड़ान...





हर रोज़ की तरह थके कदमों से और थोड़ा डरे हुए मै ऑफिस पहुंचा....न्यूज़ रुम के गेट तक धड़कते दिल से पहुंचा और ईश्वर का नाम लेकर अंदर घुसा ....पाया कि बॉस नहीं आया है....कुछ राहत मिली...मीडिया से जुड़े छह महीने पूरे होने को थे लेकिन अभी तक वो जिगरा नहीं आ पाया था कि खुलकर सांस ले सकूं....खैर..बॉस नहीं आया मै न्यूज़ रुम से कैंटीन जा पहुंचा...लोगो से नज़रे बचाकर एक कोने का सहारा लिया ताकि कोई मुझे देख नंबर बनाने के चक्कर मे चुगली न कर दे....एक कप चाय ली...कुछ खाने को लिया...कुछ और नए चेहरे जो अब मेरे अपने लगते थे मेरे पास आकर बैठ गए....बातचीत का दौर चल ही रहा था कि एक बेहद खूबसूरत चेहरे ने कैंटीन मे इंट्री मारी...हर किसी का मुंह खुल गया....बातचीत....खुसफुसाहट में बदल गई....किसी से उसने मेरा नाम पूछा मैने दूर से ही सुन लिया....मेरे अंदर तो मानो बिच्छू का डंक दौड़ गया...मै समझ गया कि आज अगर इस लडकी ने कैंटीन में सभी उम्दा और सीनियर लोगो को छोड़ मुझसे मिली तो शिकायत पक्की वो भी तड़का मार के....फिर वहीं गालियां...वहीं कटाक्ष....जो सरे आम मुझे नंगा कर देते...मै सिहर उठा....तब तक वो मेरे पास पहुंची....बोली मेरा नाम मानसी है आपके साथ आपकी टीम में हूं.....बॉस ने कल ही इन्टरव्यू लिया और पास कर दिया था....मुझे तो चक्कर काटते काटते चक्कर आने लगे थे....खैर...कैंटीन से तुरंत बाहर निकला और अपनी डेस्क पर जा बैठा...मानसी मेरे साथ थी...और सभी की नज़रे मुझे घूर रही थी....तभी बॉस की इंट्री हुई....मैने गुड मॉर्निग विश किया...लेकिन उन्होने उसे हमेशा की तरह इग्नोर करते हुए मानसी को गुड मॉर्निग विश किया...पहले दिन ही बॉस ने की गुड मॉर्निग....बॉस ने मुझे ढेर सारा काम पकड़ाया मानसी को केबिन मे बुलाया और चले गए....बस फिर क्या था सभी भूखे गिद्घ की तरह मुझ पर टूट पड़े...नाम क्या है... कहां से आई...तू जानता है क्या.....इन सभी के बीच एक हफ्ता बीत गया और मानसी को पूरा न्यूज़ रुम जानने लगा मानने लगा....काम कम...अदाएं ज्यादा, बॉस ने शिफ्ट इंचार्ज से मानसी के गुणगान गाए...बस एक कप चाय के बाद शिफ्ट इंचार्ज भी मानसी के भक्त बन गए....मेरी शिफ्ट सुबह दस से रात दस...उनकी शिफ्ट सुबह बारह से शाम छह उसमें भी चाय पानी बडे लोगो के साथ कम से कम दस बार....महीना ही बीता था कि एक दिन मानसी ने मुझसे एक सवाल पूछा- कि भारत के उपराष्ट्रपति कौन है यार....I DON’T KNOW…ये राजनीति विति मुझे नहीं आती...बोरिंग....मैं मुंह खोले सुन ही रहा था कि बॉस और शिफ्ट इंचार्ज दोनो आते दिखाई दिए....मैं खड़ा हो गया....बॉस ने मानसी को देखा मुस्कुराए और बोले तुम्हारी तरक्की हो गई है......और हां तुम्हे बुलेटिन पढने का मौका भी मिल सकता है...बस ऐसे ही काम करती जाओ....और शाबासी के लिए उठा बॉस का हाथ फिसलकर कही और पहुंच चुका था....मै देखता रहा...तभी बॉस बोले काम वाम ठीक से करो और इस लड़की से कुछ सीखो....नही तो कभी तरक्की नहीं कर पाओगे....मै सुनता रहा.......उसे देखता रहा.....



दिग्विजय सिंह

1 टिप्पणी:

हरिता कथूरिया ने कहा…

aisa bhi hota h..sahi hai. Everything is possible in Media na !!!