
और अधिक विस्तार पाने को
और मैं झुकाता हूं अपने आप को
तुम्हारे होठों पर समूची पृथ्वी को चूमने।
SONG- पानियों में चल रही है ..
SINGER- सज्जाद अली
PAKISTANI ALBUM
Song- चल चले अपने घर..
Lyricist- सईद क़ादरी
Singer- जेम्स
Music- प्रतीम चक्रबर्ती
Film- वो लम्हें
सुधीर मिश्रा मुंबईया फिल्म इंडस्ट्री का वो नाम हैं जिसकी काबिलियत को मैं- आप यहां कैसे? सुधीर मिश्रा- बस कुछ दोस्तों ने बुला लिया तो हम आ गये। वैसे भी जहां-जहां सिनेमा का जमघट होता है, वहां हम पहुंच ही जाते हैं। मैं- किस तरह का सिनेमा पसंद है आपको? सुधीर मिश्रा- देखिए सिनेमा, सिनेमा होता है। अच्छा बुरा नहीं। कई लोगों की मेहनत छुपी होती है ,उसके पीछे। वैसे ईरान वाले अच्छा काम कर रहे हैं। मैं- यानी आप भी माजिद मजिदी और मौहसिन मखमलबाफ के फैन हैं। सुधीर मिश्रा-देखिये मुझे लगता है कि लोगों को अब कुछ दूसरे फिल्मकारों की फिल्में भी देखनी चाहिए। जहां तक इन दोनों फिल्मकारों का सवाल है। मैंने इनकी ज्यादा फिल्में नहीं देखी हैं। मैं- पिछले दिनों एक फिल्म देखी नाम था 'जाने भी दो यारो' उसमें एक नाम पढ़ा सुधीर मिश्रा।वहां से आज इस मकाम पर पहुंच कर खुद में कितने बदलाव महसूस करते हैं?( जाने भी दो यारो का स्क्रीन प्ले सुधीर मिश्रा ने लिखा है) सुधीर मिश्रा- बदल तो मैं गया हूं। पिछले बीस सालों से भी ज्यादा समय से इंडस्ट्री में हूं। बीच में 80 और 90 के दशक में कुछ खराब किस्म के लोगों का कब्ज़ा हो गया इस इंडस्ट्री पर। अब हालात थोड़े ठीक हैं। नए लोग काफी आ रहे हैं। हम भी हैं। खुदा ने चाहा तो आने वाले दस-बीस सालों तक जम कर पिक्चरें बनाएंगें। मैं- आपकी नई फिल्म आने वाली है,'खोया खोया चांद' उसके बारे में कुछ बताएं? सुधीर मिश्रा- खोया खोया चांद मे कहानी है इस फिल्म इंडस्ट्री की। फिल्म बनकर तैयार है। इसलिए ज्यादा तो नहीं बताऊंगा। लेकिन इतना जरुर कहूंगा कि एक खास समय को कैमरे से फिल्माना आसान काम नहीं है। मैं- ट्रैफिक सिग्नल में आप मुंबईया भाई के किरदार में दिखाई दिये थे। अब कब हम आपको स्क्रीन पर देखेंगे? सुधीर मिश्रा- मधुर तो अपना दोस्त है। उसने कहा इस किरदार को करो तो मैंने कर लिया। वैसे मैं इससे पहले हज़ारों ख्वाइशें ऐसी में कुछ पल के लिए नजर आया था। गौर से देखिएगा, शायद खोया खोया चांद में भी नज़र आ जाऊं। जब कोई जूनियर कलाकार नहीं आता तब डॉयरेक्टर होने के नाते उस किरदार को जीना पड़ता है। तुषार उप्रेती |
ये वो युवा टीम है जिसने पहला ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप जीता और वो भी तब जब तीन बड़े दिग्गज टीम से बाहर थे। अब आने वाला समय इन्हीं युवा खिलाड़ियों का है जिन्हें विरोधी खिलाड़ियों की फ़ब्तियां सुनने की आदत नहीं । ये वो युवा चेहरे हैं जो दुश्मन की आंखों में आंखें डालकर खुलकर कर रहे हैं हम किसी से कम नहीं।
वक्त के साथ दौर बदलता है और दौर बदलने के साथ लोगों के देखने का नज़रिया भी .... बदलाव की इस दौड़ में आम जनता अपने पुराने हीरो को भूलाकर नए स्टार तलाशने लगती है। बदलाव की कुछ ऐसी आंधी आजकल भारतीय क्रिकेट पर भी हावी है। वक्त के साथ टीम इंडिया में ज़िम्मेदारियां भी बढ़ रही और इन ज़िम्मेदारियों को संभालने वाले कंधे भी। आखिर कब तक टीम इंडिया बिग थ्री यानी सचिन, सौरव और राहुल द्रविड़ के भरोसे रह पाती। एक दिन तो ऐसा आना ही था जब इन तीनों की जगह कुछ नए और काबिल चेहरों को भरनी थी। सचिन, सौरव और राहुल की गैर-मौजूदगी में एक नए कप्तान और नई टीम के साथ टीम इंडिया पहले ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप में खेलने उतरी। किसने सोचा था कि ये नौसिखिया टीम वर्ल्ड चैंपियन बनकर वापिस लौटेगी। आखिर उसी नौसिखिया टीम ने अपनी युवा शक्ति के बूते चैंपियनों को धूल चटाकर सबको हैरानी में डाला दिया। ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप की जीत के बाद ये बात और खुलकर सामने आ रही है कि टीम इंडिया अब वाकई युवाओं के भरोसे है। रोबिन उथप्पा के बयान से तो ये बात और भी पुख्ता हो गई है। मुंबई में ऑस्ट्रेलिया के साथ होने वाले ट्वेंटी-20 मुकाबले से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक पत्रकार ने उथप्पा से पूछा कि क्या ट्वेंटी-20 में बिग थ्री की ग़ैर-मौजूदगी खलेगी ? तो उथप्पा का साफ कहना था कि हमने सचिन, सौरव और राहुल के बिना ही ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप जीते था। उथप्पा की तरह इस सच को मानने वालों की कमी नहीं है कि अब टीम इंडिया को अगर जीतना है सचिन का बल्ला चलना ज़रूरी नहीं। जी हां, अब वो दिन लद गए हैं। अब टीम इंडिया के पास धोनी, युवराज,हरभजन ,उथप्पा, रोहित शर्मा, इरफ़ान, आर पी सिंह, श्रीसंत, गंभीर जैसे वो नाम हैं जिनमें जोश भी है और वक्त पड़ने पर टीम को संकट से निकालने की काबलियत भी। ये वो खिलाड़ी हैं जो विरोधी टीम के दबाव में आने की बजाए उन्हें ईंट का जवाब पत्थर से देना जानते हैं। टीम इंडिया के पास अब वो युवा ब्रिगेड है जो अपने विपक्षी खिलाड़ियों की आंखों में आंखें डालकर कह रही है.. हम है यंग इंडिया।
तुषार उप्रेती
कुछ करिए
कुछ करिए
नस-नस मेरी ख़ौले..
होए कुछ करिए
कुछ करिए
कुछ करिए
बस-बस बड़ा बोले..
अब कुछ करिए
हो.. कोई तो चल ज़िद फ़ड़िए
डबे, करिए या मरिए
हे.. कोई तो चल ज़िद फ़ड़िए
डूबे, करिए या मरिए
चक दे..
हो चक दे इंडिया
चक दे..
हो चक दे इंडिया
nowhere to run nowhere to hide
this is the time to do it now
गूंजों में गलियों में
रातों में फलियों में
महलों में बीजों में
ईदों में तीजों में
रेतों के दानों में
फ़िल्मों के गानों में
सड़कों के गड्डों में
बातों के अड्डों में
हुंकारा आज भर लें
दस-बारह बार कर लें
रहना ना यार पीछे
कितना भी कोई खींचे
टस है ना
मस है जी
ज़िद है तो
ज़िद है जी
पिसना यूं ही
पिसना यूं ही
बस करिए...
कोई तो चल ज़िद फ़ड़िए
डूबे, करिए या मरिए
हे.. कोई तो चल ज़िद फ़ड़िए
डूबे, करिए या मरिए
चक दे..
हो चक दे इंडिया
चक दे..
हो चक दे इंडिया
nowhere to run nowhere to hide
this is the time to do it now
लड़ती पंतगों में
भिड़ती उमंगों में
खेलों के मेलों में
बलखाती रेलों में
गानों के मीठे में
फक्कड़ में चींटें में
ढूढों तो मिल जाए
पत्ता वही जो मैं
रंग ऐसा आज निखरे
और खुल के आज बिखरे
मान गए ऐसी बोली
रग-रग में जल के बोली
टस है ना
मस है जी
ज़िद है तो
ज़िद है जी
पिसना यूं ही
पिसना यूं ही
पिसना यूं ही
बस करिए...
कोई तो चल ज़िद फ़ड़िए
डूबे, करिए या मरिए
हे.. कोई तो चल ज़िद फ़ड़िए
डूबे, करिए या मरिए
चक दे..
हो चक दे इंडिया
चक दे..
हो चक दे इंडिया
Song- सईंया-सईंया..
Lyricist- कैलाश खेर
Singer- कैलाश खेर
Music- कैलासा बैंड (कैलाश-परेश-नरेश)
Album- झूमो रे..
बहुत कम लोग जानते हैं कि कैलाश खेर गाने भी लिखते हैं। कैलाश के पास केवल जादूई आवाज़ ही नहीं है वो रूहानी कलम के भी फ़नकार है। उन्होंने अपनी पहली एलबम 'कैलासा' के लिए भी लिखा है और उनकी नई एलबम 'झूमो रे..' में भी उनके गाए गीत, उन्ही के लिखे हुए हैं। आपको उनका एक ख़ूबसूरत गाना तो याद ही होगा- 'तेरे नाम से जी लूं, तेरे नाम से मर जाउँ'
आपके लिए पेश है कैलाश खेर का लिखा और उन्हीं का गाया एक गाना...
ये गाना सुनने के लिए आप यहां क्लिक करें।
"हीरे-मोती मैं ना चाहूं, मैं तो चाहूं संगम तेरा..
मैं तो मेरी सईंया तू है मेरा..
तू जो छू ले प्यार से आराम से मर जाऊं,
आजा चंदा बाहों में
तुझ में ग़ुम हो जाऊं
मैं तेरे नाम में खो जाऊँ
सईंया... सईंया..
मेरे दिन खुशी से झूमें, गाए रातें
पल-पल मुझे डूबाए जाते-जाते
जीत-जीत हारूं, ये प्राण-प्राण वारूं
हो.. ऐसे मैं निहारूं
तेरी आरती उतारूं
तेरे नाम से जुड़ें हैं सारे नातें
सईंया....
बनके माला प्रेम की तेरे तन पे झर-झर जाऊं
बैठूं नईया प्रीत की संसार से तर जाऊं
तेरे प्यार से तर जाऊं
सईंया.....
ये नरम-नरम नशा है बढ़ता जाए
कोई प्यार से घुंघटिया देता उठाए
अब बावरा हुआ मन
जग हो गया है रोशन
ये नई-नई सुहागन
हो गई है तेरी जोगन
कोई प्रेम की पुजारन मंदिर सजाए
सईंया... सईंया....
हीरे-मोती मैं ना चाहूं
मैं तो चाहूं संगम तेरा
मैं ना जानूं, तू ही जाने
मैं तो तेरी, तू है मेरा................ "